भरत भूषण तिवारी मौत मामला: BHRC ने माता-पिता को अंतरिम मुआवजा देने का दिया निर्देश, जांच जारी

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौथी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से हुई मौत के मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने मानवीय आधार पर मृतक के माता-पिता को उचित अंतरिम (एक्स-ग्रेशिया) मुआवजा देने का निर्देश बिहार सरकार को दिया है। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना के लिए राज्य सरकार या उसके अधिकारियों की कोई जिम्मेदारी है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. बदर ने 3 जुलाई 2026 को यह आदेश पारित किया। यह मामला 17 जून 2026 को भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से हुई मौत से संबंधित विभिन्न शिकायतों की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई में बिहार सरकार की ओर से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) ने आयोग को बताया कि मामले की पुलिस जांच अभी जारी है। विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही, इस मामले की न्यायिक जांच पटना हाईकोर्ट के माध्यम से भी चल रही है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि भरत भूषण तिवारी की मौत गोली लगने से हुए अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) और शॉक के कारण हुई। आयोग ने इसे एक युवा जीवन की दुखद क्षति बताया। आयोग ने यह भी कहा कि सार्वजनिक कानून के तहत राज्य पर मुआवजे की कानूनी जिम्मेदारी तय करने के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि राज्य मशीनरी की ओर से अवैध, दुर्भावनापूर्ण या घोर लापरवाहीपूर्ण कार्रवाई हुई हो। चूंकि पुलिस और न्यायिक दोनों जांच अभी लंबित हैं, इसलिए इस स्तर पर राज्य की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा। हालांकि, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले भी पीड़ित परिवार को अंतरिम राहत दी जा सकती है। इसी प्रावधान के तहत बिहार सरकार को निर्देश दिया गया कि मृतक के आश्रित माता-पिता को उचित एक्स-ग्रेशिया राशि प्रदान की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम राहत होगी और इससे जांच के अंतिम निष्कर्ष या राज्य की कानूनी जिम्मेदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आयोग ने बिहार सरकार और संबंधित अधिकारियों को 3 अगस्त 2026 तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
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