सुप्रीम कोर्ट की सख्ती! बिना विधायक बने मंत्री रहने पर दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में, बिहार सरकार से मांगा जवाब

पटना/नई दिल्ली: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की मंत्री पद की कुर्सी पर संकट गहराता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार सरकार से पूछा कि जब दीपक प्रकाश छह महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य, तो वे आखिर किस संवैधानिक आधार पर मंत्री पद पर बने हुए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह पूरी तरह संविधान और कानून से जुड़ा मामला है। अदालत ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगा है। सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है और अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा। दीपक प्रकाश को वर्ष 2025 में पहली बार पंचायती राज मंत्री बनाया गया था, जबकि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। बाद में सरकार में बदलाव के बाद उन्हें दोबारा उसी विभाग का मंत्री बनाया गया, लेकिन अब तक वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बन सके हैं। इसी दोबारा नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी गैर-विधायक व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। इसी संवैधानिक प्रावधान को आधार बनाकर याचिका दायर की गई है। अब 27 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न सिर्फ दीपक प्रकाश के मंत्री पद, बल्कि इस मामले से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है। — मिथिला हिन्दी न्यूज
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