बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए राज्य सरकार ने नगर निकायों के बड़े पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिलों से नगर निकायों के पुनर्गठन, क्षेत्र विस्तार और अपग्रेडेशन के प्रस्ताव मांगे हैं। सरकार का उद्देश्य बदलती आबादी और शहरी जरूरतों के अनुसार शहरों का विकास करना है।
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि 31 मार्च 2027 तक जनगणना का कार्य पूरा होने के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार नगर पंचायतों को नगर परिषद और नगर परिषदों को नगर निगम का दर्जा दिया जा सकता है। साथ ही शहरों की सीमाओं के विस्तार और आवश्यक होने पर निकायों के विलय पर भी विचार किया जाएगा।
वर्तमान में बिहार में 19 नगर निगम, 89 नगर परिषद और 156 नगर पंचायत हैं। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो यह राज्य के शहरी प्रशासन में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
संभावित बदलाव
- नगर पंचायतों को नगर परिषद बनाया जा सकता है।
- तेजी से विकसित नगर परिषदों को नगर निगम का दर्जा मिल सकता है।
- शहरों की सीमाओं का विस्तार किया जा सकता है।
- नए क्षेत्रों को शहरी विकास योजनाओं का लाभ मिलेगा।
- सड़क, पेयजल, सीवर, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा।
किन शहरों की हो रही चर्चा?
सरकार ने अभी किसी भी शहर के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि स्थानीय प्रशासनिक चर्चाओं में दानापुर, खगड़िया, जमालपुर, जनकपुर रोड, औरंगाबाद, डेहरी, हाजीपुर, सिवान और किशनगंज जैसे शहरों के नाम संभावित रूप से सामने आ रहे हैं। इन शहरों में आबादी, व्यापारिक गतिविधियां और शहरी विस्तार तेजी से बढ़ा है। लेकिन अंतिम निर्णय जनगणना, विभागीय जांच और सरकारी अधिसूचना के बाद ही होगा।
नगर निगम बनने से क्या होगा फायदा?
नगर निगम बनने के बाद शहरों को अधिक बजट मिलने की संभावना रहती है। इससे सड़क, जलापूर्ति, सीवर नेटवर्क, कचरा प्रबंधन, पार्क, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल नागरिक सेवाओं का विस्तार होगा। साथ ही शहरों की बेहतर प्लानिंग और विकास परियोजनाओं को भी गति मिलेगी। हालांकि इसके साथ होल्डिंग टैक्स और अन्य शहरी नियम भी लागू हो सकते हैं।
— मिथिला हिंदी न्यूज़
संपादक: रोहित कुमार सोनू