चांद पर पानी की मौजूदगी का मिला अहम सबूत, अपोलो-15 के हरे कणों ने खोला राज


साल 1971 में अपोलो-15 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों डेविड स्कॉट और जेम्स इरविन ने चंद्रमा की सतह पर कुछ असामान्य हरे रंग के छोटे-छोटे कण देखे थे। उस समय इन कणों को देखकर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि दशकों बाद यही नमूने चांद पर पानी को लेकर वैज्ञानिकों की समझ को बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे।

इन अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह से हरे रंग के इन कणों के नमूने एकत्र किए और उन्हें पृथ्वी पर लेकर आए। ब्राउन यूनिवर्सिटी के अनुसार, ये कण वास्तव में प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों से बने कांच के दाने थे।

ज्वालामुखी कांच में मिला पानी का संकेत

मिशन के करीब 35 साल बाद वैज्ञानिकों ने इन ज्वालामुखी कांच के दानों में पानी से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत खोजे। नासा के अनुसार, 2008 में अपोलो मिशन के नमूनों का अध्ययन कर रहे शोधकर्ताओं ने इन छोटे कांच के दानों में हाइड्रोजन की मौजूदगी का पता लगाया।

वैज्ञानिकों के लिए यह खोज बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इससे संकेत मिला कि जब चंद्रमा पर प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोट हुए और ये कांच के दाने बने, उस समय चंद्रमा के अंदर पानी मौजूद था।

इस खोज ने उस पुरानी धारणा को चुनौती दी कि चंद्रमा पूरी तरह से सूखा और पानी से रहित पिंड है। अपोलो मिशन से मिले नमूनों ने वैज्ञानिकों को चंद्रमा के शुरुआती इतिहास और उसके अंदर मौजूद पानी की संभावनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं।

मिथिला हिन्दी न्यूज
संपादक: रोहित कुमार सोनू

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