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दानापुर में गंगा का कहर, खतरे के निशान से चार फुट ऊपर पानी; शहर और सेना क्षेत्र में घुसा बाढ़ का पानी
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September 03, 2026
दानापुर: गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दानापुर में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गंगा खतरे के निशान से करीब चार फुट ऊपर बह रही है। दियारा क्षेत्र की सात पंचायतें पहले से बाढ़ की चपेट में हैं। अब नाले के रास्ते पानी सेना क्षेत्र और शहरी इलाकों में भी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
सेना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस मैदान, बीआरसी क्षेत्र मैदान, सिंगलन कोर, वैशाली इंकलेव और कोणार्क इंकलेव में नाले के रास्ते बाढ़ का पानी पहुंच रहा है। जल संसाधन विभाग की टीम पानी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए नालों को बालू से भरी बोरियों की मदद से बंद करने में जुटी है।
दानापुर के पेठिया बाजार में शिव मंदिर और कागजी मोहल्ले के पास भी नाले से पानी रिसकर अंदर आने लगा है। कार्यपालक अभियंता के अनुसार शहर और सेना क्षेत्र के सभी स्लुईस गेट और फाटक बालू से भरी बोरियों से बंद कर दिए गए हैं। देवानानाला को भी बंद कर दिया गया है। सेना इलाके में पानी रोकने के लिए बालू की बोरियां लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
दियारा की सात पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल चुका है। सड़क, खेत और निचले इलाकों में करीब तीन से चार फुट तक पानी बह रहा है। कई घरों में डेढ़ से दो फुट तक पानी घुस गया है। इसके कारण बाढ़ प्रभावित परिवार सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। शुक्रवार शाम देवानानाला में गंगा का जलस्तर 170.50 फुट रिकॉर्ड किया गया। जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया जा रहा है, लेकिन यह खतरे के निशान से करीब चार फुट ऊपर है।
कासीमचक पंचायत समेत अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोग बलदेव स्कूल स्थित राहत शिविर की ओर पहुंच रहे हैं। लोग अपने परिवार और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। बड़ा कासीमचक के बाढ़ प्रभावित सेठ राय ने बताया कि उनके घर में करीब तीन फुट पानी घुस गया था। उन्होंने घर का सामान नाव के जरिए पीपा पुल घाट तक पहुंचाया और इसके बाद राहत शिविर में शरण ली।
बाढ़ को देखते हुए बिजली विभाग ने बुधवार सुबह से छह पंचायतों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। बिजली बंद होने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। दियारा क्षेत्र की पंचायतों में अंधेरा छा गया है। बाढ़ के पानी में किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी मकई और हरी सब्जियों की फसल डूब गई है। पानी बढ़ने से किसानों को भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है।
गंगा के बढ़ते पानी का असर गंगहरा, हेतनपुर, कासीमचक, पुरानी पानापुर, पतलापुर, मानस और अकिलपुर पंचायतों पर पड़ा है। इन पंचायतों की करीब तीन लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। बिशुनपुर अस्पताल समेत कई स्कूलों में भी पानी पहुंच गया है। इससे इलाज और बच्चों की पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही है।
एसडीओ वीरूपाक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। छह पंचायतों में सरकारी स्तर पर 12 नावें चलाई जा रही हैं। मेडिकल टीम के लिए भी अलग नाव चलाने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर एसडीआरएफ की टीम को बुलाया जाएगा। नदी किनारे और दियारा के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट करते हुए ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
गुरुवार सुबह से कासीमचक के पशुपालक अपने पशुओं के साथ राहत शिविर पहुंचने लगे हैं। करीब आधा दर्जन बाढ़ प्रभावित परिवार भी शिविर में पहुंच चुके हैं। सीओ प्रदीप कुमार गुप्ता ने बाढ़ में डूबे घरों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। निचले इलाकों में घरों और झोपड़ियों में घुसे पानी का भी आकलन कराया जा रहा है।
मिथिला हिन्दी न्यूज
संपादक: रोहित कुमार सोनू
