मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
लोक आस्था, श्रद्धा और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा 2026 में नवंबर महीने में मनाया जाएगा। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में बसे लाखों श्रद्धालु इस पर्व की तैयारियों में जुटेंगे। छठ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति आस्था तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।
13 नवंबर से नहाय-खाय के साथ होगी शुरुआत
वर्ष 2026 में छठ पूजा का चार दिवसीय अनुष्ठान 13 नवंबर, शुक्रवार को नहाय-खाय से शुरू होगा। इसके अगले दिन 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का पारण होगा।
नहाय-खाय छठ महापर्व का पहला दिन होता है। इस दिन व्रती स्नान कर शुद्धता के साथ पूजा-अनुष्ठान की शुरुआत करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन घर की साफ-सफाई, पूजा की तैयारी और प्रसाद बनाने के लिए शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
इसके बाद दूसरे दिन खरना होता है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना के प्रसाद में आमतौर पर गुड़ की खीर और रोटी सहित पारंपरिक प्रसाद बनाया जाता है। इसके बाद कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत होती है।
डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य की अद्भुत परंपरा
छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। 2026 में यह 15 नवंबर, रविवार को होगा। इसके अगले दिन 16 नवंबर, सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती अपना व्रत पूरा करेंगे।
छठ की सबसे खास बात यह है कि इसमें डूबते सूर्य के साथ-साथ उगते सूर्य की भी उपासना की जाती है। यह परंपरा जीवन में अस्त और उदय, दोनों अवस्थाओं के प्रति समान सम्मान का भाव प्रस्तुत करती है।
2026 से 2040 तक छठ पूजा की तारीखें
वर्ष 2026 में 15 नवंबर, 2027 में 4 नवंबर, 2028 में 23 अक्टूबर, 2029 में 11 नवंबर और 2030 में 1 नवंबर को छठ पूजा का मुख्य दिन पड़ेगा। इसके बाद 2031 में 20 नवंबर, 2032 में 9 नवंबर, 2033 में 29 अक्टूबर, 2034 में 17 नवंबर और 2035 में 6 नवंबर को छठ पूजा होगी।
आगे 2036 में 25 अक्टूबर, 2037 में 13 नवंबर, 2038 में 2 नवंबर, 2039 में 21 नवंबर और 2040 में 10 नवंबर को छठ पूजा का मुख्य दिन होगा।
इन तारीखों से साफ है कि छठ की तारीख हर साल एक जैसी नहीं रहती और यह हिंदू पंचांग की तिथियों के आधार पर बदलती रहती है।
छठ के दौरान घाटों की सफाई, सजावट, पूजा सामग्री की तैयारी और प्रसाद बनाने की प्रक्रिया कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। बिहार में तो छठ के आने से पहले ही घर-घर में इसकी तैयारियों का माहौल दिखाई देने लगता है।
छठ की आस्था में एक खास संदेश छिपा है—प्रकृति का सम्मान, सूर्य के प्रति कृतज्ञता, परिवार की मंगलकामना और कठिन परिस्थितियों में भी विश्वास बनाए रखना। यही वजह है कि समय बदलने के बावजूद छठ महापर्व की परंपरा और श्रद्धा लगातार मजबूत होती जा रही है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू