मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
बिहार समेत मिथिलांचल में संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर मनाया जाने वाला प्रसिद्ध जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत आज, 2 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। पर्व की शुरुआत आज नहाय-खाय की परंपरा से होगी। इसके बाद 3 अक्टूबर को माताएं निर्जला उपवास रखेंगी और भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करेंगी।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जितिया का मुख्य व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। व्रत से पहले सूर्योदय से पूर्व ओठगन की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद व्रती महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखती हैं। 3 अक्टूबर की शाम भगवान जीमूतवाहन की पूजा और जितिया व्रत की कथा सुनने की परंपरा है।
व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा। अलग-अलग स्थानों के पंचांग के अनुसार पारण के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय का पालन करना उचित माना जाता है। उपलब्ध पंचांग जानकारी में 4 अक्टूबर को सुबह करीब 7:28 बजे के बाद पारण का समय बताया गया है।
जितिया पर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व मां और संतान के बीच स्नेह, ममता और मंगलकामना की लोकपरंपरा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माताएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू