महाषष्ठी की शाम होगी बेल न्योति की विशेष पूजा, विधि-विधान से मां दुर्गा को दिया जाएगा आमंत्रण


शारदीय नवरात्र एवं दुर्गा पूजा के दौरान महाषष्ठी की शाम बेल न्योति की विशेष परंपरा निभाई जाती है। इस अवसर पर विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ बेल वृक्ष की पूजा कर जगत जननी मां दुर्गा को पूजा स्थल एवं पंडाल में पधारने के लिए आमंत्रित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विशेष प्रक्रिया को ‘विल्वाभिमन्त्रण’ अथवा ‘बेलन्योति’ कहा जाता है।

स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि शास्त्रीय पद्धति में बेल यानी विल्व वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। महाषष्ठी की शाम पूजा समिति के सदस्य और श्रद्धालु भक्त गाजे-बाजे एवं डोली के साथ आचार्य और पुरोहित को लेकर बेल वृक्ष के पास पहुंचते हैं। वहां विधिवत पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और संकल्प के माध्यम से बेल वृक्ष का पूजन किया जाता है तथा मां दुर्गा को पूजा स्थल पर पधारने के लिए न्योता दिया जाता है।

पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि बेल न्योति की यह परंपरा शारदीय दुर्गा पूजा की महत्वपूर्ण धार्मिक रस्मों में से एक है। श्रद्धालु इस दौरान मां दुर्गा से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। इसके बाद विधि-विधान के साथ मां की पूजा-अर्चना और दुर्गा पूजा के अन्य अनुष्ठानों की शुरुआत होती है।

षष्ठी तिथि का समय: पंचांग के अनुसार षष्ठी तिथि गुरुवार की रात्रि 1 बजकर 53 मिनट के बाद आरंभ होगी और शुक्रवार की रात्रि 3 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसी अवधि में महाषष्ठी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान और बेल न्योति की परंपरा श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ संपन्न की जाएगी।

बेल न्योति के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। गाजे-बाजे के साथ निकलने वाली यह धार्मिक यात्रा दुर्गा पूजा के माहौल को और भी भक्तिमय बना देती है।

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