भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत का मामला संसद पहुंचा, सांसद सुधाकर सिंह ने कुंदन कृष्णन के मानहानि नोटिस पर मांगा हस्तक्षेप

मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए मानहानि के कानूनी नोटिस को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप करने की मांग की है। सांसद ने इस पूरे मामले की जांच कराने और प्रारंभिक जांच में पर्याप्त आधार मिलने पर इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का अनुरोध किया है। सुधाकर सिंह के अनुसार, कुंदन कृष्णन ने अपने निजी वकील के माध्यम से उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। सांसद का दावा है कि नोटिस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया है। इसके अलावा पांच करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सांसद ने इस कार्रवाई को जनहित के मुद्दे उठाने और अपने संसदीय दायित्वों के निर्वहन से जोड़ते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ के आरोप हैं। सुधाकर सिंह ने घटना को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनके पत्र के अनुसार, मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था और मृतक की मां की शिकायत पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। सांसद ने यह भी दावा किया है कि राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के लिए समिति गठित की है, लेकिन जांच के निष्कर्ष अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। सांसद सुधाकर सिंह ने मांग की है कि जांच केवल घटना में सीधे तौर पर शामिल बताए जा रहे पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उस समय के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए। उनके अनुसार, घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के महानिदेशक थे। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि घटना से संबंधित आदेश किस स्तर पर दिए गए, अधिकारियों के बीच क्या संवाद हुआ और पुलिस मुख्यालय को घटना की जानकारी कब मिली। सांसद का कहना है कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। मानहानि के कानूनी नोटिस को लेकर सुधाकर सिंह ने आशंका जताई है कि इससे उन्हें इस मामले को संसद में उठाने से रोकने की कोशिश हो सकती है। यह सांसद का अपना दावा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 105 का उल्लेख करते हुए कहा है कि संसद सदस्यों को संसदीय कार्यों के दौरान अपनी बात रखने और अपने दायित्व निभाने से संबंधित संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इसी आधार पर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से यह भी स्पष्ट कराने की मांग की है कि कुंदन कृष्णन ने कानूनी नोटिस किस हैसियत से भेजा था और क्या इस कार्रवाई के लिए बिहार या केंद्र सरकार से कोई अनुमति ली गई थी। उन्होंने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 17 का भी हवाला दिया है। इसके साथ ही नोटिस भेजने वाली निजी विधि फर्म की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यह जानकारी मांगी है कि फर्म केवल अधिकारी के निजी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही थी या उसे बिहार सरकार की ओर से भी पक्ष रखने का अधिकार दिया गया था। अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के रुख पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सांसद की शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या मामला संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाता है। वहीं, भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत से जुड़े आरोपों, पुलिस अधिकारियों की कथित भूमिका और कानूनी नोटिस के विवाद में आगे की स्थिति जांच तथा संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
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