युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहने पर जीतन राम मांझी पर भड़के चिराग पासवान, बोले- राजनीति के लिए ऐसी भाषा ठीक नहीं

मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहे जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर नाराजगी जताई है। चिराग पासवान ने कहा कि राजनीति करने के लिए कुछ लोग कुछ भी बोल देते हैं, लेकिन युवाओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना कतई उचित नहीं है। युवाओं को इस तरह संबोधित करना किसी भी स्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता। चिराग पासवान ने युवाओं के वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शन और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। विरोध प्रदर्शन के नाम पर अराजकता का माहौल बनाना उचित नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र और युवा आंदोलन समय-समय पर देश की दशा और दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। देश के इतिहास में ऐसे कई आंदोलन हुए हैं, जिन्होंने दशकों तक समाज और राजनीति को नई दिशा देने का काम किया है। इसलिए युवाओं के आंदोलनों को गलत तरीके से पेश करने या उन्हें अराजकता से जोड़ने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। चिराग पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्ष को एसआईआर या चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात जनता के सामने रखनी चाहिए। जिन राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं, वहां भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकसभा के विपक्षी सांसदों को भी इस्तीफे की मांग करने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखनी चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि हर समस्या का समाधान इस्तीफा देने से नहीं निकलता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर हर चीज का हल इस्तीफा देने से निकलता, तो चिराग पासवान कब का इस्तीफा दे दिया होता।" चिराग पासवान ने अपनी भूमिका को लेकर कहा कि वह लगातार विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं और केंद्र सरकार के सामने भी कई विषयों पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने खुद को सरकार में चौकीदार की तरह बताते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर वह सरकार के सामने भी सवाल खड़े करते हैं। चिराग पासवान के इस बयान के बाद युवाओं के सम्मान, राजनीतिक बयानबाजी और एसआईआर को लेकर जारी बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि युवाओं के आंदोलनों को लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए और राजनीतिक मतभेदों के बीच भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
👁️ अब तक पढ़ा गया: बार

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.