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टेलीविजन इंडस्ट्री में था चमकता सितारा अब बिहार की राजनीति में हो गई है जोरदार इंट्री

जानिए बिहार के यूथ पॉलिटिक्स में क्यों चर्चा में है जय सिंह राठौर


टेलीविजन और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी चमक बिखेरने के बाद अब बिहार के पॉलिटिक्स में इंट्री मार चुके हैं जय सिंह राठौर

अनूप नारायण सिंह
पटना। बिहार के युवा राजनीतिज्ञों में अपनी सशक्त पहचान बनाने में सफल हुए हैं फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े जय सिंह राठौड़ जिन्होंने काफी कम समय में बिहार की राजनीति में अपनी सशक्त पहचान बनाई है मूल रूप से वैशाली जिले के महनार प्रखंड के हसनपुर गांव के रहने वाले जय सिंह राठौर का जन्म 21 दिसंबर 1984 को उनके पैतृक गांव में ही हुआ था उनके पिता जगदीश सिंह इलाके के एक सामान्य किसान के रूप में जाने जाते हैं जबकि माता प्रभा सिंह गृहिणी है अपने माता-पिता की इकलौती संतान जय सिंह राठौर की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा पटना में तथा बाद में देश के विभिन्न शहरों में हुई। बचपन से ही लीक से अलग हटकर कुछ करने में विश्वास रखने वाले जय सिंह राठौर 1999 में प्रिंस ऑफ बिहार बने उसके बाद फैशन और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के प्रति उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई बिहार और देश के कई फैशन शो के यह विजेता रहे आकर्षक लुक और बेहतर कद काठी वाले जय सिंह राठौर ने 2001 में मुंबई का रुख किया जहां प्रख्यात फिल्मकार पहलाद कक्कर के टीम से एजस्टेशन असिस्टेंट जुड़ कर काम करने लगे उसके बाद एकता कपूर के टीम से जुड़े और कई सीरियलों में नजर आए इस दौरान ज़ी टीवी के सीरियल यह वादा रहा में भैया जी का इनका कैरेक्टर इन को पूरे देश के घर-घर में पहचान दिलाने में सफल रहा सिद्धिविनायक प्रोडक्शन के भी कई सारे सीरियल्स में यह नजर आए बतौर एक्टर जय गढ़ी माई इंस्पेक्टर चांदनी और कई फिल्मों में भी इन्होंने अपने अभिनय प्रतिभा का हुनर दिखाया 2015 में जय सिंह राठौर वापस बिहार लौटे तथा यहां रियल एस्टेट बिजनेस में अपनी किस्मत आजमाने के लिए शिव्या रीयलटेक प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया तथा रियल एस्टेट के कारोबार में भी पूरी ईमानदारी के साथ आगे की तरफ बढ़ने लगे मुंबई प्रवास के दौरान इनकी जान पहचान मुकेश साहनी से थी 2020 में मुकेश साहनी ने इन्हें अपने पार्टी से जुड़ा तथा कला संस्कृति प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया इससे पहले सिंह राठौर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा बिहार प्रदेश के युवा अध्यक्ष के पद पर काम कर रहे थे इस दौरान उन्होंने काफी बेहतर काम किया तथा कई सफल बड़े आयोजनों के भागीदार भी बने वर्तमान समय में पंच सरपंच महासंघ के संरक्षक हैं इनके नेतृत्व में पटना के बापू सभागार में पूरे बिहार के पंच सरपंच का जुटान हुआ था इस सम्मेलन को ऐतिहासिक माना गया है ये बिहार रसोईया संघ के भी यह संरक्षक है
साथ ही साथ वार्ड संघ के राष्ट्रीय संरक्षक भी है इतना ही नहीं जन आंदोलनों में इनकी अच्छी खासी भागीदारी है बिहार के विकास को लेकर जय सिंह राठौर का मानना है कि अब वह समय आ गया है जब बिहार के युवाओं को सक्रिय राजनीति में आगे आना होगा समाज को एकजुट करने के लिए गरीब और वंचित सभी जाति धर्म के लोगों को एक मंच पर लाना होगा बिहार की 80 फ़ीसदी जनता गांव में रहती है जब तक गांव सशक्त नहीं होंगे तब तक बिहार सशक्त नहीं होगा गांव और पंचायत अर्थ रोजगार स्वास्थ्य शिक्षा सब तरीकों से संपन्न होने चाहिए बुनियादी सुविधाएं आजादी के 75 वर्षों के बाद भी गांव तक नहीं पहुंची है उनका सपना है कि बिहार का हर एक युवा जो 18 वर्ष का हुनरमंद और अपने पैरों पर खड़ा हो इसके लिए शिक्षा प्रणाली में बड़ा परिवर्तन करना होगा बच्चों को छठी क्लास से ही उनके रूचि के अनुसार विषय वस्तु की ही पढ़ाई के प्रति ध्यान देना होगा तभी जाकर वे 18 वर्ष की आयु तक आते-आते अपने पैरों पर खड़े होंगे और अपने रूचि के क्षेत्र में बेहतर कर पाएंगे यह जरूरी नहीं कि समूह को सरकारी नौकरी दी जाए लोगों को हुनरमंद बनाकर भी उन्हें सशक्त और स्वरोजगार दिया जा सकता है बिहार के विकास को लेकर इनका मानना है कि कृषि के क्षेत्र में ईमानदारी के साथ काम किया जाए तो बिहार में पलायन भी रुक जाएगा तथा लोगों का आर्थिक स्तर भी बढ़ेगा बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी हुई है लेकिन सरकारी असहयोग और उन्नत कृषि कार्य नहीं होने के कारण लोगों को अब कृषि में कोई रुचि नहीं रह गई है युवाओं को सोशल मीडिया से दूर रहने की हिदायत देने वाले जय सिंह राठौर का मानना है कि जब तक टेलीफोन तार से जुड़ा था इंसान स्वतंत्रता और जब से टेलीफोन तार से अलग हुआ इंसान से लिपट गया इंसान वही सोचता है समझता है जो सोशल मीडिया उसे समझाती और दिखाती है भविष्य के लिए यह काफी खतरनाक है।खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर उनका कहना है कि वह किसी हड़बड़ी में नहीं है पर वह चाहते हैं कि वह बिहार के उस विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े जो बिहार का सबसे पिछड़ा लोकसभा या विधानसभा है जहां बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं सड़क नहीं बिजली नहीं पानी नहीं लोगों का आर्थिक स्तर काफी नीचे है जहां जनप्रतिनिधियों ने लोगों के साथ बड़ा विश्वासघात किया है अपने गृह विधानसभा क्षेत्र महनार के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि महनार सच में बिहार का सबसे पिछड़ा विधानसभा है वे अपने स्तर से पिछले 5 वर्षों से महनार में कुछ ज्यादा ही सक्रिय है लोगों के सुख-दुख के भागी बनते हैं जन समस्याओं पर आवाज उठाते हैं अपने स्तर से जितने लोगों की मदद कर सकते हैं मदद करते हैं यहां आने वाला भविष्य तय करेगा कि राजनीति में उन्हें कहा जाना है पर एक बात तो साफ है वह पूरी इमानदारी से जात धर्म से ऊपर उठकर लोगों को एकजुट करने तथा उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सजग करने की दिशा में सार्थक काम कर रहे हैं। 

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