शिक्षा में असमानता और नई शिक्षा नीति पर जनसंगठनों की विमर्श - mithila Hindi news

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शिक्षा में असमानता और नई शिक्षा नीति पर जनसंगठनों की विमर्श

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संवाद 

दलित विकास अभियान समिति द्वारा ऑक्सफेम इंडिया के सहयोग से आयोजित विमर्श बैठक में पूर्व प्राथमिक शिक्षा और वर्तमान प्रस्थिति कोविड 19 से प्रभावित शिक्षण कार्य, शिक्षा अधिकार अधिनियम को अनदेखी तथा प्रभावहीन कर नई शिक्षा नीति संसद से बिना स्वीकृति के कैबनेट द्वारा पारित कर लागू करना हास्यास्पद हैं।मानवाधिकार एक्टिविस्ट धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 21(क) के तहत शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू किया परन्तु उसे सही से क्रियान्वित नही किया गया। और नही शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति, प्रशिक्षण, वर्ग कमरा, सुरक्षा की प्रबंधन के साथ विद्यालय शिक्षा समिति को सशक्त नही किया गया,और नही बच्चों को किताब दिया गया, बने प्राथमिक विद्यालय को बिना समुदाय की सहमति से विलय करना शिक्षा के अमूल्यो पर प्रतिघात किया गया हैं। देश की सर्वोच्च संसद से बिना स्वीकृति के कैबिनेट द्वारा पारित कर साजिस के तहत नई शिक्षा नीति को लागू किया जाना गैरसंवैधानिक हैं। कार्यक्रम का उद्देश है की सरकार सार्वभौमिक गुणवत्ता वाली सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करके असमानता को दूर करने के लिए नीतियों को लाये और सार्वजनिक शिक्षा के लिए बजट आवंटन GDP 12% बढ़ाने की की बात किया जाना है | ये तभी संभव है जब तक समुदाय और जनप्रतिनिधि, शिक्षक संगठन और विद्यालय शिक्षा समिति , छात्र, मीडिया, एक साथ इस मुद्दों पर साझा रणनीति के साथ बेहतर रणनीतिक साझेदारी से ही संभव है ,यदि यह नहीं हुआ तो शिक्षा बाजारीकरण होने से कोई नही बचा सकता है।
जरूरत हैं विभिन्न जनसंगठनों के समन्वय स्थापित कर सरकार से इस नीति को पुनर्विचार करने कि वकालत करने को तभी बाजारीकरण पर अंकुश लगाया जा सकता हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते उक्त बात धर्मेन्द्र कुमार ने कहाँ।डॉ मिथलेश कुमार सचिव चेतना विकास संस्थान ने शिक्षा अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में सरकार की असामनता की वजह से लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित है, शिक्षकों की स्थितियों पर ध्यान नही देना भेदभाव उजागर करता हैं , वही दोहरी वेतनमान नीति जो अमानवीय गरिमा पर आघात हैं। इन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति समाजविरोधी हैं, जिसे समुदाय के सहयोग बिना नही रोका जा सकता हैं, और इसके लिए सभी सामान विचारधारा वाले जनसंगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर जनअभियान चलाने की कार्य योजना रखा।रजनीश कुमार राज्य अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ(शिक्षक संघ)बिहार ने शिक्षकों स्थायी नियुक्ति और वर्गीय शिक्षक के साथ विद्यालय में संसाधन उपलब्धता की बात किया और शिक्षकों को समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत बताया।नवलकिशोर प्रसाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ताजपुर ने शिक्षकों की दायित्व के साथ समुदाय को जागरूक होंकर अपने बच्चों की जिसदिन नियमित रूप से विद्यालय भेजना शुरुआत कर देंगे उसदिन निजी स्कूल की दरवाजा बंद हो जाएगी। विद्यालय समुदाय की भागीदारी से चलना चाहिए न कि एकल शिक्षकों पर आश्रित होकर रहने से आज शिक्षा की स्थिति दयनीय हो रही हैं।अमित कुमार वर्मा सचिव आशा सेवा संस्थान ने सामाजिक शैक्षिक और नवाचार प्रक्रिया से शिक्षण व्यवस्था को लागू करने के साथ समुदाय को खुद आगे आने की जरूरत बताया इन्होंने विद्यालय शिक्षा समिति को जवाबदेह बनाने की की आवश्यकता पर बल दिया।
सहभागियों ने चर्चा को जीवंत बनाते हुए निम्न प्रमुख विंदुओं को उजागर किया , 1 केंद्र सरकार जिन कॉरपोरेटवादी , विभेदवादी , मनुवादी और बाजारवादी विचारों की पोषक है नई शिक्षा नीति उन विचारों के पोषण का दस्तावेज है .2. नई शिक्षा नीति में कॉलेजों को स्वायत्त बनाने का प्रावधान कर सरकार उच्च शिक्षा से अपना पल्ला झाड़ रही है .इसलिये नई शिक्षा नीति गरीबों , वंचितों ,गांवों में रहने वाले लोगों दलितों , पिछड़ों , अल्पसंख्यकों , महिलाओं और कमजोरवर्गों को उच्च शिक्षा से रोकती है .
3 . 800 विश्वविद्यालयों और 40000 कॉलेजों को बंद कर इसकी संख्या 15000 करने का प्रावधान भी उच्च शिक्षा से रोकने के लिये ही है .4. कॉलेज और विश्वविद्यालय और स्कूल को निजी हाथों में सौपना न केवल छात्र विरोधी है बल्कि शिक्षक विरोधी भी है . 5.नई शिक्षा नीति 50 % छात्रों को कौशल विकास ( वोकेशनल )की ओर ले जाने की बात करता है . और यह प्रक्रिया 7 वीं कक्षा से शुरू होकर 11वीं तक चलेगी . मतलब यह शिक्षा नीति संस्थानिक ड्रॉप आउट को बढ़ावा देती है . वोकेशनल कोर्स के नाम पर बढ़ईगिरी , राजमिस्त्री के काम को शिक्षा कर गरीबों को उच्च शिक्षा से रोका जा रहा है . आई ए एस , आई पी एस , बीपीएस ( राज्य लोक सेवा आयोग ) और इंजीनियर डाक्टर बनने का रास्ता गरीबों दलितों पिछड़ों के लिए बंद .6. नई शिक्षा नीति में कौशल विकास या वोकेशनल शिक्षा की बात सस्ते मजदूर तैयार करने के लिये की गई है . " मेक इन इंडिया " के लिये विदेशी कम्पनियों को सस्ते मजदूर उपलब्ध कराना इस नीति का निहितार्थ है .7 . नई शिक्षा नीति में 10 - 20 प्राथमिक स्कूल के ऊपर एक क्लस्टर( स्कूल कमलेक्स ) बनाने की बात की गई है . यहीं पर खेल का मैदान होगा , कला शिक्षक होंगे , पुस्तकालय होगा . मतलब आसपास के स्कूल जो 1किमी की परिधि में प्राथमिक और 3 किमी की दूरी पर जो मिडिल स्कूल का प्रावधान RTE में किया गया है वो खत्म . ये स्कूल बंद हो जायेंगे . 8. नई शिक्षा नीति में डिजिटल एजुकेशन / ऑन लाईन क्लास की बात की गई है . इससे मोबाईल कम्पनी , नेट , गूगल आदि को तो फायदा होगा ही शिक्षक की छंटनी ( बहाली बंद ) और स्कूल भी बंद होंगे .
9 . नई शिक्षा नीति में कहा गया है शिक्षा प्राचीन और सनातन ज्ञान परम्परा पर आधारित होगा . " Ancient and Eternal " . Wisdom - ज्ञान परम्परा . ये उद्देश्य शक पैदा करने वाला है . कमियां समाज ( श्रम करने वाले अछूत सहित ) की प्राचीन संस्कृति क्या है ? क्या प्राचीन संस्कृति में चार्वाक , बुद्ध और महावीर होंगे ? नहीं होंगे .
10 . नई शिक्षा नीति में Ngo को विभिन्न गतिविधि कराने एवं पढ़ाने की भी बात की गई है . ये ngo कौन होगा ? ngo को कौन तय करेगा ? और ngo कौन सी गतिविधि बच्चों से करवाएंगे . नई शिक्षा नीति शिक्षक केंद्रित teacher centric की बात कर क्लास रूम डेमोक्रेसी को रोकने ,सवाल पूछने से रोकने की बात करता है द्रोणवादी शिक्षक परम्परा की बात करता है .
11 . प्रारम्भिक कक्षाओं में मातृभाषा में शिक्षा देने और भाषा सम्बंधी नीति में भी अस्पष्टता है एवं हिंदी क्षेत्र में संस्कृत थोपने की भी साजिश है . मातृ भाषा के बारे में कहा गया है घर में बोली जाने वाली भाषा या उस प्रदेश / क्षेत्र की भाषा . 12 . नई शिक्षा नीति अति केंद्रीयकृत है सब कुछ केंद्र सरकार के हाथ है . इसलिये यह संघीय ढांचे के खिलाफ भी है ,उक्त कार्यक्रम को संचालन परियोजना समन्वयक बबीता कुमारी ने किया और स्वागत एच आर ऑफिसर माधुरी कुमारी ,प्रधानाध्यापक अरुण कुमार ,जयप्रकाश मल्लिक संकुल समन्वयक,विद्यालय शिक्षा समिति फेडरेशन के अध्यक्ष फूलकुमारी देवी अब्दुल कयूम अराजपत्रित शिक्षक संघ, शाहिद खान प्रखंड साधन सेवी के अलावे शिक्षा सेवी शिक्षकों ने भी उचित दूरी में बात रखा। धन्यवाद ज्ञापन कंचन कुमारी एवं संगीता कुमारी ने की !

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