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निकम्मों को ही रोजगार मांगते देख रहा हूं : पंकज झा शास्त्री

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पंकज झा शास्त्री का बेरोजगारी पर विश्लेषण 


मिथिला हिन्दी न्यूज :- आज भी रोजगार की कमी नहीं है,बेरोजगारी का हल्ला करने वाले घटिया राजनीति करने वाले नेताओं की देन है,जिसमें न काम करने की चाहत रखने वाले निकम्मों की भीड़ होती है।

बेरोजगारी आने का कारण - 
पहले सभी को पेट भरता था एक कमाने वाले और उसके पीछे 10खाने वाले होते थे आज 10 कमाने वाले फिर भी दलिद्रता सवार है।

पहले सभी अपने अपने कर्म के साथ एक दूसरे से जुड़े थे आज लगभग सभी अपना कर्म छोड़ कर दूसरे के कर्म को हथिया कर आगे बढ़ना चाहते है।

नाई दरवाजे पर जाकर बाल काटना छोड़ दिया,धोवी आंगन से कपड़ा लाना छोड़ दिया,अधिकतर किसान गाय भेंष पालना और अधिकतर खेती करना छोड़ दिया, पनवारी पूजा पाठ में पान देना छोड़ दिया ,पंडित भी भ्रष्ट होकर वेद पढ़ना छोड़ दिया।कहने का तात्पर्य सभी ने अपना कर्म क्षेत्र को छोड़ दिया और जो कुछ कर भी रहे है तो उन्होंने अपना कर्म स्वरूप बदल लिया जहां सभी जल्दी नही पहुंच पाते जैसे नाई ने सैलून बनाकर, धोबी ड्राईक्लीन बनाकर,पंडित संस्कृत को हिंदी में पढ़ कर। आदि तरह क्रमशः अधिकतर अपने कार्य क्षेत्र से दूर हो रहे है।

सभी चाहता है बहुत कम समय में बिना मेहनत का ही धन अर्जित कर ले सभी डॉक्टर,इंजीनियर और कलेक्टर ही बनेगा तो खेती कोन करेगा?

हां सभी ने अपनी अपनी जाति संगठन जरूर बना लिया है जो मकर जाल की तरह लोगो के मानसिकता को जकर रखा है।

लोगो के मन में जाति भेद भाव पहले की अपेक्षा अभी अधिकता है।

आज जल, दूध हुआ महगा।
सस्ता सराब और खून।

जी हां आज पीने के लिए जल को विकते देख रहा हूं,गाय भेंश के सुद्ध दूध के लिए तरस रहा हूं।
जगह जगह शराब के केंद्र खुलते देख रहा हूं,मामूली बातो पर भी खून होते देख रहा हूं।


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