आज लगने वाला सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक काल मान्य नहीं - mithila Hindi news

mithila Hindi news

नई सोच नई उम्मीद नया रास्ता

आज लगने वाला सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक काल मान्य नहीं

Share This
पंकज झा शास्त्री 9576281913

मिथिला हिन्दी न्यूज :- इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को लगने जा रहा है। इस दिन दुनियाभर के कई देशों में रिंग ऑफ फॉयर का दुर्लभ नजारा भी दिखेगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा की परछाई सूर्य के 97 फीसदी हिस्से को पूरी तरह से ढक लेगी। इस कारण कुछ समय के लिए सूरज की आकृति किसी हीरे की अंगूठी के जैसे दिखाई देगी। यह इस साल का दूसरा ग्रहण है। इससे पहले 26 मई को चंद्रग्रहण लगा था। यह सूर्यग्रहण गुरुवार को ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष आमावस्या तिथि को लग रहा है। साथ ही इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी है,सूर्य ग्रहण वृषभ राशि में लग रहा है। भारत में यह सूर्य ग्रहण आंशिक है, इसीलिए इस ग्रहण के बारे में अधिकतर पञ्चांग में उल्लेख नहीं किया गया है। पंडित पंकज झा शास्त्री के अनुसार 03ग्रहों का राशि परिवर्तन और दो ग्रह होंगे वक्री जून के महीने में मंगल, सूर्य और शुक्र का राशि परिवर्तन होने जा रहा है, इसके साथ ही बुध और गुरु वक्री होने जा रहा है।वक्री अवस्था में ग्रहों का प्रभाव कम हो जाता है,शनि पहले से ही मकर राशि मे वक्री है। शनि को भी जोड़ लिया जाय तो जून में तीन ग्रह वक्रीदिशा में होने जा रहे है।

रिंग ऑफ फॉयर का सबसे शानदार नजारा रूस और कनाडा में देखने को मिलेगा। अमेरिका और ब्रिटेन में यह सूर्यग्रहण आंशिक रूप से ही दिखाई देगा। स्कॉर्टलैंड में सूर्य का 30 फीसदी हिस्सा और दक्षिणी इंग्लैंड में 20 प्रतिशत हिस्सा ही ढंका नजर आएगा। अमेरिका के पूर्वी राज्यों में यह 70 फीसदी तक दिख सकता है।
इस सूर्य ग्रहण को वलयकार ग्रहण के रूप में जाना जाता है। यह तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा बिल्कुल पृथ्वी के सीध में होते हैं। इस दौरान चंद्रमा का स्पष्ट आकार सूर्य से छोटा होता है। इस कारण सूरज हीरे की अंगूठी की तरह चमकता नजर आता है। खगोल वैज्ञानिक इसी घटना को रिंग ऑफ फायर का नाम देते हैं।

ब्रिटेन और आयरलैंड के लोगों को अर्धचंद्राकार सूर्य नजर आएगा। वहीं, अमेरिका में लोग सूर्योदय के समय आंशिक ग्रहण देख पाएंगे। सूर्योदय के समय ग्रहण की घटना को भी दुर्लभ माना जाता है। 
भारत में नहीं लगेगा यह ग्रहण
भारत में 10 जून को लगने वाला ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इस कारण ग्रहण के पहले लगने वाला सूतक भी मान्य नहीं होगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन, भारत में इसका प्रभाव न होने के कारण 10 जून को मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे। इस दिन खास संयोग बन रहा है। शनि अमावस्‍या और वट सावित्री पूजा होने के काण इसका खास महत्‍व हो गया है।
हिंदू पंचांग के मुताबिक़ 10 जून को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि है। इस दिन एक तरफ जहां वट सावित्री व्रत है, वहीं इसी दिन अमावस्या और शनि जयंती भी हैं। ये महत्वपूर्ण हैं। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग और संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है और महिलाएं कथा सुनती है। इस दिन अमावस्या तिथि भी है तो पितरों के लिए तर्पण कार्य के लिए उत्तम है।
सहर के सुप्रसिद्ध ज्योतिष पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि शनि देव का जन्म हुआ था। इस दिन को शनि जयंती के नाम से जाना जाता है। इस बार 10 जून को साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। यह ग्रहण कुल 5 घंटे का होगा और भारत के समय के अनुसार दोपहर 1.42 बजे पर शुरू होकर शाम 6.41 पर समाप्त होगा। भारत में नहीं दिखने के कारण इसका भी सूतक मान्य नहीं होगा ।

live

हमारे बारें में जानें

अगर आप विज्ञापन और न्यूज देना चाहते हैं तो वत्सआप करें अपना पोस्टर 8235651053

Pages