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95% बिहारवासियों को नहीं पता है की आखिर ये “नोटा” क्या होता है ? जरूर जाने अपनी इस ताकत को

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राहुल आंनद 

क्या आप मतदान करने में नोटा का मतलब जानते हैं?
नोटा का मतलब होता है नान ऑफ द एवब ,इसका अर्थ होता है कि हम चुनाव में खड़े किसी भी कैंडिडेट को वोट नहीं देना चाहते हैं। नोटा का उपदेश उन मतदाताओं के लिए विकल्प है जो चुनाव में खड़े किसी भी कैंडिडेट को अपना मत नहीं देना चाहते है। यार चुनाव में खड़े उस कैंडिडेट के प्रति विरोध का हथियार है। निर्वाचन आयोग ने एक ऐसी व्यवस्था विकसित की है जिसमें यह दर्ज हो सके कि कितने प्रतिशत लोग किसी को भी वोट देना उचित नहीं समझते हैं। उन मतदाताओं के लिए नोटा का ऑप्शन रखा गया है।
 
 
इस को दबाने का मतलब यह है कि चुनाव में खड़े उम्मीदवारों में से आपको कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है। ईवीएम मशीन में नोटा का गुलाबी रंग का बटन होता है। वोटों की गिनती करते समय नोटा में कितने वोट आए हैं इसका भी आकलन किया जाता है। जब नोटा की व्यवस्था हमारे देश में नहीं थी तो लोग मतदान ना करके अपना विरोध दर्ज करते थे। भारत में जब ईवीएम की व्यवस्था नहीं थी तब बैलट पेपर पर वोट दिया जाता था। तब मतदाता अपने बैलट पेपर को खाली छोड़ कर अपना विरोध दर्ज करते थे। इसका अर्थ यह है कि मतदाताओं को कोई भी कैंडिडेट स्वीकार नहीं है।
पहली बार कब हुआ नोटा का इस्तेमाल?
भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन अर्थात ईवीएम मैं नोटा का बटन देने के निर्देश दिए।तथा नोटों की गिनती की समय कितने लोगों ने नोटा पर वोट किया है, इसकी गिनती भी की जाती है। भारत, ग्रीस, स्पेन कोलंबिया और रूस समेत अन्य कई देशों में नोटा का विकल्प लागू है।नोटा की वोटों की गिनती तो होती है मगर इनका वोट किसी भी उम्मीदवार को नहीं दिया जाता है अर्थात ही यह वोट रद्द माने जाते हैं। नोटा को वोट करना एक प्रकार से अपने वोट को खराब करना माना जाता है।
 
 
मतदान कानून 1961 का नियम 49-0 कहता है। यदि कोई मतदाता वोट डालने पहुंचता है और फॉर्म 17A एंट्री के बाद 49एल के उप नियम के तहत रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर व अंगूठे का निशान लगा देते हैं। और उसके बाद वोट नहीं दर्ज करना चाहते हैं तो रजिस्टर पर इसका रिकॉर्ड होगा तथा मतदाता को कमेंट के रूप में अपनी बात दर्ज करनी होगी ।चुनाव आयोग में स्पष्ट किया है कि नोटा के मत गिने तो जाएंगे मगर इन्हें रद्द मतों की गिनती में रखा जाएगा अर्थात यदि 100 में से 99 मत नोटा को प्राप्त हुए हैं और एकमत किसी कैंडिडेट को तो वाह कैंडिडेट विजेता होगा।

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