अपराध के खबरें

रोग और उम्र को कभी हावी नहीं होने दिया

- योग और व्यायाम से भी मिला लाभ 
- नियमित दिनचर्या और उचित पोषण से मिलती है सहायता

वैशाली। 19 मई 

प्रिंस कुमार 
एक कहावत है मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। ठीक यही कहावत मेरे साथ घठित हुआ जब मुझे पता चला कि मैं कोरोना संक्रमित हूं। सैंकड़ों उलझने मन में थी, पर मैंने खुद को समझा लिया कि अगर मैं अभी मानसिक रुप से हार गया तो हो सकता है जिंदगी भी हार जाऊं। यह कहना है देसरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत बीसीजी टेक्नीशियन सुजय का। वह कहते हैं 4 अप्रैल को पीएचसी में ही ठंड के साथ बुखार आया। दो दिन दवा ली। ठीक हो गया। 17 अप्रैल को फिर से वहीं लक्षण। मन में शंका हुई तो पीएचसी में ही टेस्ट कराया तो पॉजिटीव निकला। लोगों से बचते बचाते मैं घर पहुंचा। घर के गेट पर खड़ा था, पर दरवाजे को खोल नहीं रहा था। मेरा बेटा समझ गया कि मैं पॉजिटीव हो गया हूं। 

चौकन्ना भी रहा और प्रसन्नचित भी
सुजय कहते हैं जब मैंने पॉजिटीव होकर होम आइसोलेशन का विकल्प चुना तो सबसे ज्यादा खतरा मुझे लगा कि मुझसे मेरे ही लोग कहीं संक्रमित न हो जाएं। इसके लिए मैंने खाने के लिए पत्तल का उपयोग किया। अपना झूठा और कचरा भी मैं ही फेंकता था। पीएचसी से ही मेडिकल किट के दवाओं का सेवन किया। अनुलोम विलोम, हल्का फुल्का व्यायाम भी किया। सबसे बड़ी बात थी कि अपने आप को मैंने कभी बीमार नहीं फील होने दिया। 56 साल का हूं बीपी और थायराइड का पेशेंट भी हूं पर कभी इसे अपने मन पर हावी नहीं होने दिया। घर का साधारण खाना खाया। दिन में तीन से चार बार भाप लिया। खाने में रोज एक अंडा लेता था। 
वैक्सीनेशन से मिली सहायता
सुजय कहते हैं मैंने 26 अप्रैल को टीकाकरण का पहला डोज लिया था। जिससे मुझे कोरोना से लड़ने में काफी सहायता मिली। मेरी स्थिति कभी गंभीर नही हो पायी। अगर कोई भी व्यक्ति कोविड के गंभीर परिणाम से बचना चाहता है तो वह कोविड टीकाकरण जरुर कराएं। होम आइसोलेशन के दौरान घरवाले भी मास्क का प्रयोग जरुर करें।

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