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सम्राट चौधरी की पगड़ी का क्या होगा? नीतीश को CM पद से हटाने के लिए खाई थी कसम

संवाद 

बिहार में शीतलहर का प्रकोप है लेकिन राजनीतिक पारा लगातार चढ़ रहा है. चर्चा है कि नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारने वाले हैं. नीतीश कुमार महागठंबधन की गाड़ी छोड़कर एनडीए के रथ पर सवार होने वाले हैं.

इन कयासों के बीच ये भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के एनडीए में आने का ऐलान इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि सीएम और डिप्टी सीएम का पेंच अभी भी फंसा हुआ है. कहा जा रहा है बीजेपी जेडीयू को दो डिप्टी सीएम पद ऑफर कर रही है. जबकि नीतीश कुमार सीएम पद से कम पर राजी नहीं हैं.

बिहार की राजनीति को जानने वालों का मानना है कि बीजेपी नीतीश कुमार को सीएम बनाने के लिए भी राजी हो सकती है. क्योंकि सूबे की सियासत से ज्यादा भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार में लोकसभा की 40 सीटें है जिसपर नीतीश के साथ रहकर 39 पर जीत दर्ज की थी.

फिर सम्राट चौधरी की प्रतिज्ञा का क्या?

इन सियासी सरगर्मियों के बीच एक सवाल ये भी उठ रहा है नीतीश कुमार को बीजेपी अगर सीएम बनाने के लिए राजी हो जाती है तो फिर सम्राट चौधरी के उस भीष्म प्रतिज्ञा का क्या होगा जो उन्होंने नीतीश कुमार को सीएम पद की कुर्सी से हटाने के लिए लिया है. 

दरअसल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने अपने सिर पर पगड़ी बांध कर एक प्रण लिया है. (बिहार के लोग पगड़ी को मुरैठा कहते हैं.) बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने विधानसभा के मुहाने पर ये ऐलान किया था कि वह जब तक नीतीश कुमार को बिहार के सीएम पद की कुर्सी से हटाएंगे नहीं तब तक अपनी पगड़ी खोलेंगे नहीं.

नीतीश ने पूछा था पगड़ी क्यों?

छह महीने पहले की ही बात है. बिहार विधान परिषद की कार्यवाही चल रही थी. इस दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के सिर पर बंधी पगड़ी को लेकर सवाल किया. इसे क्यों पहनते हैं? तब सम्राट चौधरी ने जवाब दिया था आपको मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद ही मैं पगड़ी खोलूंगा. इसमें आपका भी आशीर्वाद चाहिए. 

नीतीश कुमार तब मुस्कुराने लगे थे. सम्राट चौधरी ने ये बयान सदन से बाहर आकर गेट पर भी दोहराया. इसके बाद अब सवाल उठता है सम्राट चौधरी के पगड़ी का क्या होगा? अगर बीजेपी ही नीतीश को सीएम बना देती है?

‘कोई स्थाई दोस्त-दुश्मन नहीं ‘

इस सवाल पर बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते है. राजनीति में कोई स्थाई दोस्त-दुश्मन नहीं होता है और ना कोई प्रतिज्ञा,भीष्म प्रतिज्ञा. यह समय-समय पर या कहें मौके की नजाकत को देखकर बदलते रहते हैं. जिस लालू यादव का विरोध कर नीतीश बिहार की सत्ता में आए उसी लालू यादव के साथ सत्ता के लिए साथ हुए. 

उद्धव ठाकरे, अरविंद केजरीवाल कांग्रेस विरोध की राजनीति करते थे. दोनों ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई. नीतीश कुमार ने भी तो कहा था मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे.

सम्राट-चिराग दोनों महत्वपूर्ण

रवि उपाध्याय ने कहा सम्राट चौधरी बिहार में बीजेपी का बड़ा पिछड़ा चेहरा हैं. देश में अभी पिछड़ा-अति पिछड़ा की राजनीति हो रही है. इसलिए बीजेपी सम्राट को नाराज नहीं करेगी. लेकिन पार्टी हित के लिए वह नीतीश के लिए दरवाजे खोल सकती है. 

बिहार में लोकसभा चुनाव के पिछले प्रदर्शन को दोहराने के लिए बीजेपी को नीतीश कुमार की जरूरत है. इसलिए जिस संभावनाओं की चर्चा हो रही है बीजेपी उसके साथ जा सकती है. रही बात चिराग पासवान की तो बीजेपी चिराग को भी कभी नहीं खोना चाहेगी. मौके की नजाकत को देखते हुए चिराग पासवान भी नीतीश के साथ खड़े हो सकते है.

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