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वकील से मारपीट पर HC की तल्ख टिप्पणी, बोला- 'पटना किसी के भी रहने के लिए सुरक्षित शहर नहीं'


संवाद 


बिहार हाईकोर्ट ने मंगलवार (5 मार्च) को कड़ी फटकार लगाते हुए पटना में जूनियर वकील के साथ मारपीट के एक मामले में दोषी मकान मालिक का पक्ष लेने के लिए पटना पुलिस को फटकार लगाई. साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की कि पटना किसी के भी रहने के लिए सुरक्षित शहर नहीं है. जस्टिस विवेक चौधरी ने यह टिप्पणी पटना हाईकोर्ट के जूनियर वकील अभिषेक कुमार की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई की. अभिषेक कुमार ने अपने मकान मालिक और पटना के जक्कनपुर इलाके के गुंडों के विरुद्ध मामूली विवाद पर चाकू मारने का इल्जाम लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. दरअसल कुछ दिन पहले पार्किंग की जगह को लेकर याचिकाकर्ता और उसके साथी वकील से उसके मकान मालिक का विवाद हुआ था. इसके बाद मकान मालिक ने धारदार चाकू से वार किया, जिससे वकील जख्मी हो गए.  वहीं वकील ने थाने में शिकायत की, लेकिन थानेदार ने ऐसी धारा लगाई जिससे थाने से ही दोषियों को बेल मिल जाए. 

वकील ने पुलिस पर किसी के दबाव में आईपीसी की धारा 307 की जगह 308 लगाने का इल्जाम लगाया था. 

इसके बाद अब कोर्ट ने पटना के एसएसपी राजीव मिश्रा को एसआईटी गठन करने का निर्देश दिया है. जस्टिस विवेक चौधरी ने वकील अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसएसपी को निर्देश दिया कि एसआईटी में दो अन्य पुलिस अधिकारी होंगे, जो एसडीपीओ रैंक के होंगे. इस टीम में इस जांच में पहले से सम्मिलित अधिकारी नहीं होगा और टीम एसएसपी की देखरेख में जांच करेगी. वहीं कोर्ट ने सख्त लहजे में बोला कि जक्कलपुर थाने के पुलिस अब आगे इस मामले की जांच में सम्मिलित नहीं होंगे. कोर्ट ने एसएसपी से उस इलाके और जक्कनपुर थाने के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. कोर्ट ने माना कि पीड़ित जब पुलिस स्टेशन गए तो पुलिस ने केस लेने से मना किया. इसके बाद दबाव बनाने पर पुलिस ने शिकायत लिखी. पुलिस आईपीसी की धारा 323 और 308 के तहत मामला दर्ज किया और दोषी को थाने से ही सीआरपीसी की धारा 41(ए) के तहत छोड़ दिया. वहीं कोर्ट ने मालिक की ओर से वकील पर किए गए केस को भी गलत बताया. कोर्ट ने यह भी बोला कि जब मकान मालिक और उसकी पत्नी ने चाकू से आंख के नीचे वार किया, उस चाकू से किसी की जान भी जा सकती है तो पुलिस ने आईपीसी की धारा 307 के तहत केस क्यूं नहीं दर्ज किया? वहीं वकील ने इल्जाम लगाया है कि यह घटना 3 तारीख की रात्रि को हुई थी. इसके बाद थाने को जानकारी दी गई. पुलिस ने मुख्य दोषी मकान मालिक नीतीश और उसके एक साथी को पकड़ लिया था, लेकिन थानाध्यक्ष ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए दोनों को रात्रि में ही छोड़ दिया. पुलिस ने दोनों को अपनी गाड़ी से घर छोड़ा था, जबकि वकील के बोलने के बाद भी पुलिस ने पीड़ित को हॉस्पिटल नहीं पहुंचाया. वहीं अगले दिन केस के आईओ शंभू पंडित हॉस्पिटल में पीड़ित का बयान लिया था.

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